विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए, संगीत के प्रधान सम्पादक डॉ० लक्ष्मीनारायण गर्ग ने उ० प्र० शिक्षा बोर्ड की कक्षा 9 व 10 तथा प्रयाग संगीत समिति इत्यादि के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लाभार्थ, सरल भाषा में पुस्तक लिखने का दायित्व मुझे सौंपा । उनके प्रोत्साहन से ही इस पुस्तक को लिखने का साहस जुटा पाया हूँ ।
मैंने इसमें सभी संगीत संस्थाओं के प्रारम्भिक पाठ्यक्रमानुसार पूरी सामग्री देने का प्रयास किया है, और परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के उदाहरण भी दिए हैं । आशा है विद्यार्थीगण इससे लाभान्वित होंगे ।
भूमिका (भाग -2)
संगीत विद्यार्थियों के लिए सरल भाषा में सुलभ संगीत राग परिचय भाग एक की तरह, उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लाभार्थ और उनके हित को ध्यान में रखते हुए संगीत राग परिचय भाग दो प्रकाशित किया जा रहा है।
इस पुस्तक में उच्च कक्षाओं के संगीत विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रमानुसार पूरी सामग्री देने का प्रयास किया गया है, जैसे भारत की गायन शैलियाँ, रागों का समय विभाजन, प्रसिद्ध संगीतज्ञों का जीवन परिचय, विभिन्न वाद्यों का वर्णन इत्यादि ।
ये सब मां सरस्वती के कण्ठहार के बहुमूल्य रत्न हैं, जिन्हें वरदान रूप में प्राप्त कर विद्यार्थी अमूल्य निधि से सम्पन्न होकर जीवन में आनन्द की अनुभूति करेंगे ।
सोने की तरह इस ज्ञान की साधना की अग्नि में तप कर हम बह्मानन्द सहोदर की प्राति कर सकते हैं।
एकांत हो अथवा सहवास, सुख हो अथवा दुख, इन राग रागनियों की सिद्धि सुन्दर मणियों के समूह हैं, जो सब प्रकार से पवित्र, मंगलमयी, अमूल्य सुन्दर निधि हैं।
अंक का दूसरा भाग उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी सहायक सिद्ध होगा, ऐसी मेरी आशा व पूर्ण विश्वास है। इस पुस्तक के प्रकाशन में संगीत पत्रिका के प्रधान सम्पादक डॉ० लक्ष्मीनारायण गर्ग का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
यह दूसरा भाग, प्रथम भाग की तरह माँ सरस्वती के चरणों में समर्पित है ।
विषय सूची
| भूमिका | 6 |
| प्रथम अध्याय (क्रियात्मक राग परिचय) | 16 |
| द्वितीय अध्याय (ताल विज्ञान) भातखण्डे पद्धति में तालों का वर्णन | 92 |
| पं० विष्णुदिगम्बर ताल लिपि के अनुसार तालों का वर्णन | 97 |
| तृतीय अध्याय (क) संगीत | 106 |
| तृतीय अध्याय (ख) संगीतशास्त्र | 110 |
| चतुर्थ अध्याय (संगीत की गायन शैलियाँ) | 135 |
| पंचम अध्याय (जीवन परिचय) | 141 |
| षष्ठम अध्याय (वाद्ययंत्र परिचय) | 153 |
| सप्तम अध्याय | 173 |
| अष्टम अध्याय (निबन्ध) | 182 |
| अनुक्रमणिका (भाग 2) | |
| यू० पी० बोर्ड के इण्टर का पाठ्यक्रम | 9 |
| प्रयाग संगीत समिति का पाठ्यक्रम (तृतीय और चतुर्थ वर्ष) | 12 |
| प्रथम अध्याय | |
| भातखण्डे और विष्णुदिगम्बर स्वरलिपि पद्धतियों का परिचय | 16 |
| राग दुर्गा का परिचय व आलाप तान | 18 |
| राग केदार का परिचय व आलाप तान | 21 |
| राग भीमपलासी का परिचय व आलाप तान | 24 |
| राग कामोद का परिचय व आलाप तान | 26 |
| कामोद और हमीर की तुलना | 28 |
| राग भैरव का परिचय व आलाप तान | 29 |
| राग जौनपुरी का परिचय व आलाप तान | 32 |
| राग देशकार का परिचय व आलाप तान | 34 |
| देशकार और भूपाली की तुलना | 36 |
| राग तिलग का परिचय व आलाप तान | 37 |
| राग वृन्दावनी सारंग का परिचय व आलाप तान | 39 |
| राग पटदीप का परिचय व आलाप तान | 41 |
| राग जयजयवंती का परिचय व आलाप तान | 43 |
| राग मालकौंस का परिचय व आलाप तान | 46 |
| राग गौड़सारंग का परिचय व आलाप तान | 48 |
| राग हमीर का परिचय व आलाप तान | 50 |
| हमीर और केदार की तुलना | 52 |
| राग शंकरा का परिचय व आलाप तान | 53 |
| राग तिलक कामोद का परिचय व आलाप तान | 56 |
| राग बहार का परिचय व आलाप तान | 59 |
| राग कालिंगड़ा का परिचय व आलाप तान | 61 |
| कालिंगड़ा और भैरव की तुलना | 63 |
| राग पीलू का परिचय व आलाप तान | 64 |
| राग मारवा का परिचय व आलाप तान | 67 |
| राग मुलतानी का परिचय व आलाप तान | 69 |
| राग सोहनी का परिचय व आलाप तान | 72 |
| सोहनी और मारवा की तुलना | 74 |
| राग पूर्वी का परिचय व आलाप तान | 76 |
| द्वितीय अध्याय | |
| छोटे ख्याल के ठेके तीनताल, झप ताल, एक ताल (दुत) | 78 |
| बड़े ख्याल के ठेके झूमरा, आड़ा चौताल, तिलवाड़ा | 79 |
| ध्रुपद के ठेके चार ताल, सूल ताल, तीवरा, मत्त ताल | 79 |
| धमार का ठेका | 80 |
| ठुमरी के ठेके दीपचंदी व जत ताल | 80 |
| भजन, गीत और गजल के ठेके कहरवा, दादरा, रूपक | 81 |
| टप्पा का ठेका (टप्पा ताल) | 82 |
| समान मात्राओं के विभिन्न तालों का कारण व उपयोग | 83 |
| लयकारी | 84 |
| लयकारी लिखने की विधि | 84 |
| तृतीय अध्याय | |
| संगीत | 96 |
| भारत की दो मुख्य संगीत पद्धतियाँ ध्वनि व आन्दोलन | 96 |
| संगीत शास्त्र | |
| ध्वनि, नाद, नाद की विशेषताएँ | 99 |
| श्रुति, स्वर | 100 |
| थाट, मेल अथवा थाट के नियम | 101 |
| थाटों की संख्या, राग | 102 |
| थाटों और रागों की तुलना | 103 |
| जनक थाट और जन्य राग | 104 |
| आश्रय राग, वर्ण, अवयव | 104 |
| राग की जाति | 105 |
| अन्य परिभाषाएँ | 106 |
| व्याख्या सहित तान के प्रकार | 112 |
| सरल तथा जटिल अलंकारों की रचना | 114 |
| विवादी स्वर का प्रयोग | 116 |
| गीत, गांधर्व, गान तथा मार्ग व देशी संगीत | 117 |
| निबद्ध अनिबद्ध गान, रूपकालाप, रागालाप, आलप्ति गान | 118 |
| आविर्भाव तिरोभाव, स्वस्थान नियम का आलाप आक्षिप्तिका,अल्पत्व, बहुत्व | 119 |
| आधुनिक आलाप (नोम तोम तथा आकार) | 122 |
| दस सरल रागों की संक्षिप्त व्याख्या | 124 |
| चतुर्थ अध्याय | |
| श्रुतियों के विभाजन द्वारा स्वरों की स्थापना | 129 |
| उत्तरी व दक्षिणी स्वर, पं० व्यंकटमखी के 72 थाट,थाट बनाने की विधि | 135 |
| उत्तरी संगीत पद्धति से 32 थाटों की रचना, एक थाट से 484 रागों की रचना, राग रागिनी वर्गीकरण | 136 |
| पंचम अध्याय | |
| संगीत की गायन शैलियाँ ध्रुपद, धमार, ख्याल, टप्पा, ठुमरी, लक्षण गीत, स्वरमालिका, तराना, चतुरंग भजन, गज़ल, कब्बाली,लोकगीत, गीत, होली, गायकों के घराने, गायकों के गुण अवगुण | 142 |
| षष्टम् अध्याय | |
| जीवनियाँ | 154 |
| सप्तम अध्याय | |
| राग गाने का समय विभाजन | 171 |
| रागों का समय चक्र | 174 |
| अध्वदर्शक स्वर मध्यम का महत्त्व | 175 |
| स्वर तथा समय की दृष्टि से रागों के तीन वर्ग | 176 |
| परमेल प्रवेशक राग | 178 |
| अष्टम अध्याय | |
| वाद्यों के प्रकार | 179 |
| तानपूरा | 180 |
| तानपूरा के मूल तथा सहायक नाद | 183 |
| तबला | 186 |
| तबला वादन सम्बन्धी विशेष जानकारी | 190 |
| सितार | 193 |
| सितार के बोल तथा बजाने की विधि | 195 |
| सितार सम्बन्धी विशेष जानकारीमींड और सूत, छूट, कृन्तन, घसीट, पुकार,लाग डाट, कस्बी और अताई | 196 |
| नवम् अध्याय | |
| भारतीय संगीत का इतिहास | 200 |
| अति प्राचीन (वैदिक काल)प्राचीन काल, मध्य काल (मुस्लिम काल),आधुनिक काल (अँग्रेज़ी राज्य एवं स्वतन्त्रता काल) | 207 |
| दशम् अध्याय | |
| वीणा के तार पर श्रीनिवास के स्वर | 208 |
| श्रीनिवास एवं आधुनिक स्वरों की तुलना | 212 |
| कुछ रागों का संक्षिप्त विवरण | 213 |
















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